अयोध्या: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक आज दोपहर दो बजे श्रीमणिराम जी की छावनी में होगी। बैठक में मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ के चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही न्यास विलेख यानी ट्रस्ट डीड और न्यास नियमावली में संशोधन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा। इसी संशोधन को लेकर यह चर्चा तेज है कि क्या पूर्व महासचिव चंपतराय की ट्रस्ट में वापसी का रास्ता तैयार किया जा सकता है।
ट्रस्ट डीड में पहली बार संशोधन पर चर्चा
ट्रस्ट के अनुसार, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन के प्रस्ताव पर न्यास विलेख में संशोधन किया जाएगा। ट्रस्ट के गठन के बाद पहली बार नियमावली में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी, इसे लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। बैठक में संशोधन से जुड़े प्रस्तावों की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
क्या चंपतराय की वापसी के लिए बनेगा नियम?
ट्रस्ट डीड में होने वाले बदलाव को चंपतराय की संभावित वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि ट्रस्टियों की नियुक्ति और त्यागपत्र देने के बाद ऐसे सदस्यों की दोबारा वापसी के लिए नियम बनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही सीईओ की नियुक्ति को ट्रस्ट द्वारा अंगीकार करने का प्रावधान भी किया जा सकता है।
मंदिर से जुड़े लोगों के बीच भी इन दोनों बिंदुओं को लेकर प्रस्ताव आने की संभावना की चर्चा है। रामनगरी के अधिकांश संत पहले ही चंपतराय के समर्थन में सामने आ चुके हैं।
संतों ने चंपतराय की भूमिका को बताया अहम
ट्रस्ट की धर्म समिति के सदस्य और श्रीरामवल्लभकुंज के अधिकारी राजकुमार दास का कहना है कि मंदिर आंदोलन से लेकर राम मंदिर निर्माण तक चंपतराय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनका कहना है कि एसआईटी की जांच में चंपतराय का नाम नहीं है, ऐसे में उनकी ट्रस्ट में वापसी पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि नियमों में होने वाले संशोधन में इससे जुड़े बिंदुओं को भी शामिल किया जा सकता है।
स्थानीय साधु-संतों को प्रमुखता देने की मांग
वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत राघवेशदास वेदांती ने ट्रस्ट डीड में संशोधन को शुभ संकेत बताया है। उनका कहना है कि इसमें स्थानीय साधु-संतों को प्रमुखता दी जानी चाहिए। उन्होंने भी कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट में चंपतराय का नाम नहीं है, इसलिए उनकी वापसी पर विचार होना चाहिए।
डीड में बदलाव के पीछे वजह बैठक में होगी साफ
पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व अनिल अग्रवाल के अनुसार, किसी भी डीड में संशोधन उसमें पहले से निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाता है। ट्रस्ट डीड में बदलाव किस वजह से किया जा रहा है, यह ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा। दूसरी ओर, विश्व हिंदू परिषद का एक बड़ा धड़ा भी चंपतराय को मंदिर के संचालन से जोड़े रखने के पक्ष में बताया जा रहा है।
क्या है ट्रस्ट डीड?
ट्रस्ट डीड एक लिखित दस्तावेज होता है, जो ट्रस्ट बनाने वाले, संपत्ति का प्रबंधन करने वाले और लाभ पाने वाले पक्षों के बीच संबंध और नियम निर्धारित करता है। राम मंदिर से संबंधित ट्रस्ट का पंजीकरण दिल्ली में किया गया था।
प्रस्ताव के जरिए हो सकती है सदस्यों की वापसी
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश पाठक के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट की डीड में किसी सदस्य को हटाने और नियुक्त करने से संबंधित प्रावधान स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं। उनका कहना है कि जिस तरह सदस्यों का त्यागपत्र प्रस्ताव के जरिए स्वीकार किया गया था, उसी तरह प्रस्ताव के आधार पर उनकी बहाली भी संभव हो सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि डीड में इस प्रक्रिया का स्पष्ट विवरण होना जरूरी है।
